अनूपपुर में हेल्पलाइन की पोल: बिना समाधान जबरन बंद की गई शिकायत – कानून को ठेंगा
अनूपपुर। सीएम हेल्पलाइन 181, जिसे जनता की आखिरी उम्मीद कहा जाता है, अब सवालों के घेरे में है। हाल ही में दर्ज हुई शिकायत क्रमांक 33707768 (दिनांक 03-08-2025) ने सिस्टम की हकीकत उजागर कर दी है। ग्राम चोलना निवासी अजीत तिवारी ने जिला अस्पताल अनूपपुर में इलाज और दवा न मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक मरीज को सही इलाज न मिलने से हालत बिगड़ती गई। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत को निस्तारित बताते हुए लिख दिया गया कि शिकायतकर्ता फोन नंबर 8770147523 पर संपर्क में आया और वह विभाग की कार्यवाही से “संतुष्ट” है। जबकि शिकायतकर्ता का साफ़ कहना है कि उनसे किसी ने संपर्क नहीं किया और न ही वे संतुष्ट हैं।
*⚖️कानून क्या कहता है?**
मध्यप्रदेश लोक सेवाओं की गारंटी अधिनियम, 2010 नागरिक को समयबद्ध सेवाएँ प्रदान करना अधिकार है।बिना समाधान शिकायत बंद करना इस अधिनियम का उल्लंघन है। सेवा न देने पर संबंधित अधिकारी पर ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹5000 जुर्माना हो सकता है। अपील की प्रक्रिया: प्रथम अपीलीय अधिकारी पहली अपील। द्वितीय अपीलीय अधिकारी समाधान न मिलने पर अंतिम अपील, जिसके पास जुर्माना लगाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की शक्ति है।
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 166 लोक सेवक द्वारा कर्तव्य में लापरवाही और नागरिक को हानि पहुँचाना दंडनीय अपराध है। सीएम हेल्पलाइन नियमावली
शिकायत तब तक बंद नहीं हो सकती जब तक शिकायतकर्ता लिखित या रिकॉर्डेड रूप से संतुष्ट न बताए। झूठा समाधान दर्ज करना और शिकायतकर्ता को “संतुष्ट” दिखाना गंभीर कदाचार है।
*पूर्व उदाहरण कार्रवाई भी हो चुकी है**
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत प्रदेश में कई बार अधिकारियों पर जुर्माने की कार्रवाई हो चुकी है। उदाहरणस्वरूप, दामोह जिले में समयसीमा में सेवा न देने पर एक अधिकारी से ₹5000 का हर्जाना वसूला गया। लोक सेवा गारंटी अधिनियम पोस्ट) यह बताता है कि कानून केवल किताबों में नहीं, बल्कि अमल में भी है – बशर्ते नागरिक जागरूक होकर आवाज़ उठाएँ।
**अजीत तिवारी का बयान*
“मैंने साफ़ कहा कि मुझे समाधान नहीं मिला और मेरी माँ का इलाज नहीं हो पाया। फिर भी शिकायत को जबरन बंद दिखा दिया गया। यह न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि आम जनता के साथ धोखा है। यदि मेरे जैसे पत्रकार के साथ ऐसा हो सकता है, तो एक साधारण गरीब व्यक्ति की आवाज़ कैसे सुनी जाएगी? अब ज़रूरी है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।”
*✍️ जनता के लिए संदेश**
अगर आपकी शिकायत बिना समाधान के बंद कर दी जाती है, तो आप प्रथम अपीलीय अधिकारी और फिर द्वितीय अपीलीय अधिकारी के पास अपील कर सकते हैं। अधिकारी पर जुर्माना लगवाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की पूरी व्यवस्था कानून में है।
आवश्यकता पड़ने पर आप लोकायुक्त या उच्च न्यायालय तक जा सकते हैं।
*निष्कर्ष**
अनूपपुर का यह मामला केवल एक शिकायत का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को आईना दिखाता है। हेल्पलाइन का असली मकसद जनता को राहत देना है, न कि आँकड़ों में “संतुष्टि” दिखाना।
अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी कागज़ों में दब जाएगा।
