कृषि विज्ञान फैल ; पत्थर में कोटवानी ने उगाया दो सौ क्विंटल धान..!
रिपोर्ट- जगदीश भट्ट उमरिया
उमरिया। जिले में पत्थरिली भूमि में धान उत्पादन दर्शाने का मामला प्रकाश में आया है। जहां व्यापारी और प्रशासनिक करिन्दों के सांठगांठ से फर्जी गिरदावरी कराकर धान की फसल उपार्जन केंद्र में बिचौलिए के द्वारा विक्रय किया गया। मामला उमरिया जिले के मझगवां पटवारी हल्का अंतर्गत गिरदावरी में अनियमितता का है। जानकारी के अनुसार जिस भूमि पर लगभग दो सौ क्विंटल धान का उत्पादन दर्शाया गया है, वह भूमि वास्तविकता में पत्थरिली बताई जा रही है, जहाँ खेती योग्य स्थिति नहीं है। सूत्रों के मुताबिक उक्त भूमि पर धान की फसल उगाया जाना संभव नहीं है, इसके बावजूद गिरदावरी में फसल दर्शाकर उपार्जन केंद्र में धान का विक्रय किया गया। उमरिया जिले के व्यापारी खेमचंद कोटवानी द्वारा अपने निजी आराजी भूमि जो कि पथरीली है, उस पर धान विक्रय करने के आरोप है। बताया जा रहा है कि गिरदावरी के आधार पर ही सरकारी खरीद की प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका गहराती जा रही है। इस प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर मामले की जांच की मांग उठने लगी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी खरीद व्यवस्था और गिरदावरी प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
इन्होंने कहा –
* फर्जी गिरदावरी दर्ज कराकर सैकड़ों क्विंटल धान का विक्रय कर सरकार के साथ छलावा किया गया है, जिसकी शिकायत तहसीलदार को दी गई है। – रविकांत गौतम, शिकायतकर्ता
* मैंने अपनी भूमि स्थानीय रामबहोर राय को दे दी थी, उनके द्वारा फसल उगाई गई थी। भूमि में पत्थर हैं, लेकिन एक ओर खेती की जा सकती है। – खेमचंद कोटवानी, भू स्वामी
* आपका कहना ठीक है, लेकिन गिरदावरी दर्ज करना सर्वेयर का कार्य है, उनके आधार पर हम वेरिफिकेशन करते हैं। – योगिता ठाकुर, पटवारी

