अनूपपुर।
जिले में भोजन की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। शहर के प्रसिद्ध ढाबों में शामिल अजीत ढाबा में परोसे गए पराठे के अंदर से सड़ा हुआ आलू निकलने का आरोप लगा है। यह पराठा खाने के बाद स्थानीय निवासी दौलत सर की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें उपचार कराना पड़ा।
घटना के सामने आने के बाद शहर में आक्रोश का माहौल है। नागरिकों का कहना है कि यदि यही भोजन किसी बच्चे या बुजुर्ग ने खा लिया होता और स्थिति गंभीर हो जाती, तो जिम्मेदारी कौन लेता?
⚖ कानूनी पहलू
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत:
अस्वच्छ एवं दूषित भोजन परोसना दंडनीय अपराध है।
संबंधित प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकता है।
दोष सिद्ध होने पर भारी जुर्माना एवं कारावास का प्रावधान है।
इसके बावजूद सवाल उठ रहा है कि क्या जिले में खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच हो रही है?
❓ प्रशासन से बड़े सवाल
क्या फूड इंस्पेक्टर द्वारा तत्काल सैंपलिंग की जाएगी?
क्या संबंधित ढाबे को नोटिस जारी होगा?
क्या मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर FIR दर्ज की जाएगी?
क्या शहर के अन्य होटल-ढाबों की भी विशेष जांच होगी?
💰 आर्थिक पहलू भी गंभीर
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि फूड पॉइजनिंग गंभीर रूप ले ले तो निजी अस्पताल में उपचार का खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में पीड़ित परिवार आर्थिक संकट में फंस सकता है। क्या ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी तय की जाएगी?
🛑 जनता की मांग
🔴 तत्काल खाद्य निरीक्षण अभियान
🔴 संबंधित ढाबे की जांच और लाइसेंस की समीक्षा
🔴 दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई
🔴 शहर के सभी होटल-ढाबों की विशेष जांच
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की तबीयत खराब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे अनूपपुर जिले की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
भोजन जीवन देता है, लेकिन यदि वही भोजन असुरक्षित हो जाए तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि विश्वास के साथ खिलवाड़ है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।

