शहडोल (पत्रकार घनश्याम कुमार शर्मा)
शहडोल (कंचनपुर)। कंचनपुर की सराफा नदी और शासकीय भूमियों पर हो रहा अवैध पत्थर उत्खनन अब केवल राजस्व की चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध बन चुका है। पुलिस, खनिज, राजस्व और वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मौन सहमति ने माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं। यहाँ हम उन धाराओं का विवरण दे रहे हैं, जिनके तहत अपराधियों और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।*
*1. रेत और पत्थर माफियाओं के विरुद्ध कठोर कानूनी धाराएं:*
*शासकीय भूमि और नदी से अवैध उत्खनन करने वालों पर निम्नलिखित धाराओं के तहत FIR दर्ज होनी चाहिए:*
*IPC की धारा 379 (चोरी): शासकीय संपदा (पत्थर/खनिज) को बिना अनुमति निकालना सीधे तौर पर चोरी की श्रेणी में आता है।*
*IPC की धारा 430 (जलमार्ग को क्षति): सराफा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को अवैध खनन से बाधित करना और उसे क्षति पहुँचाना इस धारा के तहत दंडनीय है।*
*खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (धारा 21): बिना लाइसेंस के खनन करने पर भारी अर्थदंड और कारावास का प्रावधान।*
*👉पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: नदी के पारिस्थितिकी तंत्र* *(Ecosystem) को नष्ट करने के लिए माफियाओं पर करोड़ों का जुर्माना लगाया जा सकता है।*
*👉IPC की धारा 447 (आपराधिक अतिचार): शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर खनन करने के विरुद्ध।*
*👉’ईमान बेचने वाले’* *जिम्मेदारों पर कानूनी शिकंजा:*
*जो अधिकारी ‘चंदा वसूली’ के बदले इस अपराध को अनदेखा कर रहे हैं, वे भी उतने ही अपराधी हैं। उनके विरुद्ध ये धाराएं प्रभावी हैं:*
*भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 एवं 13: यदि कोई अधिकारी अवैध लाभ (चंदा) लेकर माफिया को संरक्षण देता है, तो उसे 7 वर्ष तक की जेल हो सकती है।*
*IPC की धारा 119 (अपराध को रोकने के लिए बाध्य लोक सेवक द्वारा अपराध की जानकारी छिपाना): यदि अधिकारी को पता है कि खनन हो रहा है और वह इसे नहीं रोकता, तो वह इस धारा के तहत अपराधी है।*
*👉IPC की धारा 166: लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति (माफिया) को बचाने या लाभ पहुँचाने के इरादे से कानून की अवज्ञा करना।*
*👉IPC की धारा 120B (आपराधिक षडयंत्र): जब अधिकारी और माफिया मिलकर सरकारी संपत्ति को लूटने की योजना बनाते हैं, तो वे षडयंत्रकारी माने जाते हैं।*
*3. *विभाग जिनकी ‘मौन* *स्वीकृति’ संदेह के घेरे में है:खनिज विभाग: रॉयल्टी चोरी और अवैध उत्खनन को रोकने में पूर्णतः विफल।*
*राजस्व विभाग: शासकीय भूमि (स्टोन माइनिंग) पर अतिक्रमण रोकने की* *जिम्मेदारी निभाने में असफल पुलिस विभाग: अवैध परिवहन करने वाले वाहनों को ‘अभयदान’ देना।*
*वन विभाग: वन सीमा क्षेत्र में पत्थरों के अवैध दोहन पर चुप्पी।*
*👉रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं*
*कंचनपुर का यह मामला “ऊपर से नीचे तक” की मिलीभगत का जीता-जागत प्रमाण है। जब रक्षक ही चंदे के लोभ में भक्षक बन जाएं, तो सराफा नदी जैसी प्राकृतिक धरोहर का अंत निश्चित है। जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को चाहिए कि वे IPC 120B के तहत उन अधिकारियों को भी सह-आरोपी बनाएं, जिनकी देखरेख में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।*

