कांग्रेस का हिंदुत्व के प्रति आस्था ढोंग  भुपेश बघेल अपनी संस्कृति भूले:- पियूष ठाकुर

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कवर्धा:- पिछले रविवार को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ब्रम्हलीन हो गए। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती दो पीठों (ज्योतिर्मठ और द्वारका पीठ) के शंकराचार्य थे। वह सनातन धर्म की रक्षा के लिए आजीवन प्रयासरत रहे। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती लंबे समय से बीमार थे। उन्होंने नरसिंहपुर जिले की झोतेश्वर पीठ के परमहंसी गंगा आश्रम में अंतिम सांस ली।

 

स्वामी जी का कवर्धा के साथ पूरे छत्तीसगढ़ से विशेष लगाव था छत्तीसगढ़ में उनके लाखो अनुयायी थे , मुख्यमंत्री भुपेश बघेल और पूरी कांग्रेस पार्टी हिंदुत्व की बात करती है धर्म संस्कृति की बात करती है पर स्वामी जी के ब्रम्हलीन होने पर कम से कम एक दिन का राजकीय शोक घोषित करना चाहिए था , परंतु सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नाराज हो जाने के डर से अपनी संस्कृति और धर्म का सम्मान नही कर रहे

भुपेश बघेल हिंदुत्व के बड़ी बड़ी बातें करते है दुसरो पर प्रश्नचिन्ह लगाते है परंतु स्वामी जी के शिष्य होने के बाद भी गुरु के प्रति आस्था कम और सोनिया राहुल के प्रति आस्था अधिक दिखती है।

Ved Sahu
Author: Ved Sahu

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