किन्नरों की 7 दिवसीय महासम्मेलन के बाद नगर में निकली कलश यात्रा
(देश भर से लगभग 1500 किन्नर हुए इकट्ठे,शहर के विभिन्न मंदिरों में पूजा अर्चना कर समाज के सुख समृद्धि की किन्नरों ने की कामना!)
(कलश यात्रा की सुरक्षा के लिए पुलिस बल के साथ किन्नर समाज के 15 से अधिक बाउंसर व किन्नर समाज के स्वयंसेवक रहे तैनात
शहर वासियों ने किया स्वागत)
(भूपेंद्र कुमार पटेल,उपसंपादक एपीआर न्यूज)
अनूपपुर/ जिला मुख्यालय अनूपपुर स्थित सिद्धिविनायक पैलेस में 11 जुलाई से अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन चल रहा है महासम्मेलन का आयोजन अनूपपुर की किन्नर व देश की पहले किन्नर विधायक शबनम मौसी के नेतृत्व में हुई।गुरुवार 17 जुलाई गुरुवार को देशभर से एक जुट किन्नरों के द्वारा कलश यात्रा निकाली गई कलश यात्रा में दो प्रकार के कलश थे जो एक माता दुर्गा के नाम व दूसरा किन्नर समाज की कुलदेवी बहुचरा माता का था,यह कलश यात्रा सम्मेलन स्थल में बहुचरा माता की पूजा अर्चना करने के पश्चात निकलते हुए सर्वप्रथम शहर के दुर्गा मंदिर पहुंची जहां सभी किन्नरों ने माथा टेकते हुए पूजा अर्चना कर मानव समाज के सुख-समृद्धि कि प्रार्थना की उसके बाद कलश यात्रा निकालते हुए शामतपुर मंदिर पहुंची जहां किन्नरों ने नृत्य आदि प्रस्तुत करते हुये शहर वासियों को आशीर्वाद दिया।
नगर में निकली कलश यात्रा
अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन में देश भर से एकत्रित हुए किन्नर समाज के लोग अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर महामंथन करते हैं, तो वहीं समाज के भलाई के लिए कामना भी करते हैं. किन्नरों ने गुरुवार को समाज की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर कलश यात्रा निकाली. झूमते नाचते और जश्न मनाते इन किन्नर समुदाय के लोगों को देखने के लिए काफी संख्या में लोग यहां पहुंचे थे. लगभग 5 किमी की कलश यात्रा में किन्नर समाज के लोगों ने स्वागत करते हुये उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
यह रहा सम्मेलन का भाव
अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन की नेतृत्वकर्ता अनूपपुर की किन्नर व देश की पहले किन्नर विधायक शबनम मौसी ने बताया कि किन्नर समुदाय में, “चावल रंगने का कार्यक्रम” एक महत्वपूर्ण रस्म है जो आमतौर पर कुलदेवी बहुचरा माता के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए आयोजित की जाती है। इस रस्म में, पंचों की उपस्थिति में चावल की तुलाई होती है, और फिर चावल, दाल, शक्कर, मेवा, और घी जैसी सामग्री हलवाई को दी जाती है ताकि खिचड़ी बनाई जा सके. यह खिचड़ी कुलदेवी को भोग लगाया जाता है और फिर समुदाय के सभी किन्नर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. इस रस्म से समुदाय में समरसता बढ़ती है और कुलदेवी के प्रति आस्था प्रकट होती है।
रोटी कार्यक्रम में पहुंचे थे किन्नर
देश भर से जुटे किन्नरों ने यह भी बताया कि अनूपपुर की किन्नर शबनम मौसी के द्वारा रोटी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था हम आपको बता दें कि किन्नर समुदाय में “रोटी का कार्यक्रम” एक महत्वपूर्ण सामाजिक अवसर होता है, जिसे आमतौर पर किसी किन्नर के निधन के बाद आयोजित किया जाता है। लेकिन बहुत से किन्नर अपने जीते जी भी इस कार्यक्रम को कर लेते हैं क्योंकि उनके ना रहने के बाद उनका कोई भी नहीं होता।
