विभागीय कार्रवाई के डर से अब पत्रकारों के खिलाफ शिकायतें, स्थानीय मीडिया पर दबाव बढ़ने की आशंका*

Share this post

.

*शहडोल
*खैरहा तेंदूपत्ता समिति के सामुदायिक भवन निर्माण में अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नोडल अधिकारी जय प्रकाश मौर्य के अधीन हो रहे इस निर्माण कार्य में टेंडर प्रक्रिया, मजदूरी भुगतान, निर्माण सामग्री और खनिज नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोप सामने आने के बाद अब एक नया मोड़ आया है।*

*सूत्रों के अनुसार, जैसे-जैसे मामले को लेकर विभागीय कार्रवाई की मांग तेज हुई, वैसे-वैसे स्थानीय पत्रकारों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराए जाने की कोशिशें सामने आने लगी हैं। पत्रकारों का आरोप — “भ्रष्टाचार उजागर करने पर निशाना बनाया जा रहा”*
*कई पत्रकारों ने बताया कि वे केवल जनता और मजदूरों की शिकायतों को उजागर कर रहे थे, लेकिन अब उनके खिलाफ झूठी/बिना आधार वाली शिकायतें दर्ज कराने,दबाव बनाने,और प्रेशर क्रिएट करने
की कोशिशें देखी जा रही हैं पत्रकारों का कहना है कि यह एक तरह से मामले को पलटकर दबाने की रणनीति जैसी लग रही है। जब सवाल निर्माण पर हैं?”
ग्रामीणों का कहना है कि—सवाल निर्माण की गुणवत्ता पर हैं,सवाल मजदूरी भुगतान पर हैं,
सवाल मुरूम (जो शहडोल में प्रतिबंधित है) के उपयोग पर हैं,
सवाल टेंडर और पारदर्शिता पर हैं,तो फिर पत्रकारों के खिलाफ शिकायत किस आधार पर?
लोग साफ कह रहे हैं कि यदि किसी भी तरह का भ्रष्टाचार नहीं हुआ, तो विभाग को—दस्तावेज जारी करने,रॉयल्टी पर्चियां सार्वजनिक करने,मजदूरी सूची दिखाने,और टेंडर प्रक्रिया स्पष्ट करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

पत्रकारों के खिलाफ शिकायत—क्या यह “रिएक्शन टू एक्सपोज़” है?विशेषज्ञों के अनुसार—जब किसी सरकारी कार्य पर गंभीर सवाल उठते हैं और उसी समय पत्रकारों के खिलाफ शिकायतें दर्ज होने लगती हैं, तो यह अक्सर “रिएक्शन टू एक्सपोज़” (खुलासे का जवाब) माना जाता है।ऐसे मामलों में सामान्यतः प्रशासन यह जांचता है कि:1. शिकायत तथ्यात्मक है या नहीं,
2. शिकायत का उद्देश्य सही है या दबाव बनाना,

3. कहीं यह लोकतांत्रिक अधिकार—पत्रकारिता—को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं।

पत्रकार संगठनों ने कहा—‘डराने की कोशिश बर्दाश्त नहीं’स्थानीय पत्रकार संगठनों ने इस घटना को गंभीर बताया और कहा— “पत्रकारों के खिलाफ शिकायतें एक संदेश हैं कि भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को टारगेट किया जाएगा। यह लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है।”

जनता और मीडिया की संयुक्त मांग जनता और मीडिया दोनों की माँग स्पष्ट है—
निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएँ,निर्माण की तकनीकी जांच हो,मजदूरी भुगतान की लेबर विभाग द्वारा जाँच हो,पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से खबर प्रकाशित करने दिया जाए,और पत्रकारों के खिलाफ की जा रही शिकायतों की पारदर्शी जांच हो।

यह पूरा मामला केवल एक सामुदायिक भवन का नहीं, बल्कि—जनता के धन, मजदूरों के अधिकार,खनिज नियमों के पालन,और प्रेस की स्वतंत्रता
से सीधे जुड़ा है।शहडोल की जनता अब यह जानना चाहती है कि—“क्या विभाग वास्तविक मुद्दों पर कार्रवाई करेगा, या पत्रकारों को ही निशाना बनाया जाता रहेगा?”

APR NEWS
Author: APR NEWS

error: Content is protected !!