शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल खरपा में प्राचार्य के रवैए से शिक्षा गुणवत्ता पर संकट
ब्यौहारी (शहडोल) शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल खरपा में शिक्षा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में शासन के नियमों की अपेक्षा प्राचार्य की मनमानी अधिक चल रही है। इसके परिणामस्वरूप छात्रों का शैक्षणिक प्रदर्शन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जबकि विभागीय अधिकारी इस दिशा में अब तक उदासीन बने हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में सम्पन्न अर्धवार्षिक परीक्षा के परिणाम अत्यंत निराशाजनक रहे। कक्षा 9 में 72 में से केवल 4, कक्षा 10 में 54 में से 22, कक्षा 11 में 48 में से 14 और कक्षा 12 में 60 में से मात्र 18 छात्र ही उत्तीर्ण हो सके। प्रतिशत के रूप में देखें तो कक्षा 9 का परिणाम 16%, कक्षा 10 का 40%, कक्षा 11 का 29% और कक्षा 12 का 30% रहा।
गुणवत्ता में गिरावट की प्रमुख वजहें
जानकारी के अनुसार विद्यालय में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति नियमों के अनुसार नहीं की गई है। भौतिकी और अर्थशास्त्र विषयों में नियमित शिक्षक मौजूद होने के बावजूद अतिरिक्त अतिथि शिक्षक रखे गए हैं, जबकि संस्कृत विषय में नियमित शिक्षक न होने पर भी अतिथि शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई।
विद्यालय का वातावरण भी तनावपूर्ण बताया जा रहा है। कुछ शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्राचार्य के व्यवहार से शिक्षकों में मनमुटाव और गुटबाजी की स्थिति बनती है। विद्यालय में खेलकूद, बालसभा जैसी गतिविधियाँ नहीं के बराबर हैं, जिससे छात्रों में नीरसता देखी जा रही है।
विद्यालय परिसर में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। पानी की टंकी प्रायः खाली रहती है और शौचालयों की सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं बताई जाती। अभिभावकों को आशंका है कि यदि यही स्थिति रही तो वार्षिक परीक्षा परिणाम और अधिक गिर सकता है।
पूर्व में संस्कृत विषय के अतिथि शिक्षक बृजेश मिश्रा कार्यरत थे, जिन्होंने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से उस विषय में किसी का पुनर्नियुक्ति नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि प्राचार्य एसएमडीसी की नियमित बैठकें किए बिना कार्यवाही कर हस्ताक्षर करवाते हैं। इस संबंध में उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पुनः पटरी पर आ सके।

